Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.28.27: जिन्होंने अनजाने में कोई अपराध किया है, उनका अपराध क्षमायोग्य है क्योंकि किसी भी व्यक्ति को सर्वत्र बुद्धि (बुद्धि) का होना संभव नहीं है ॥27॥ | mahabharat अध्याय 3.28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अबुद्धिमाश्रितानां तु क्षन्तव्यमपराधिनाम्।
न हि सर्वत्र पाण्डित्यं सुलभं पुरुषेण वै॥ २७॥
अनुवाद
जिन्होंने अनजाने में कोई अपराध किया है, उनका अपराध क्षमायोग्य है क्योंकि किसी भी व्यक्ति को सर्वत्र बुद्धि (बुद्धि) का होना संभव नहीं है ॥27॥
Those who have committed a crime unknowingly, their crime is forgivable because it is not possible for any person to have wisdom (wisdom) everywhere. ॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥