श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.28.26 
पूर्वोपकारी यस्ते स्यादपराधे गरीयसि।
उपकारेण तत् तस्य क्षन्तव्यमपराधिन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई व्यक्ति, जिसने पहले कभी तुम्हारा उपकार किया हो, तुम्हारे विरुद्ध कोई घोर अपराध करे, तो भी तुम्हें उसके पूर्व उपकार को स्मरण करके उसे क्षमा कर देना चाहिए ॥26॥
 
Even if someone who has done you a favour in the past commits a grave crime against you, you should remember his earlier favour and forgive him. ॥26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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