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mahabharat 3.28.23: अतः न तो सदैव क्रोध करना चाहिए और न सदैव कोमल स्वभाव ही रखना चाहिए। समय-समय पर आवश्यकतानुसार कभी कोमल स्वभाव और कभी आक्रामक बन जाना चाहिए॥23॥   |   mahabharat अध्याय 3.28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.28.23 
तस्मान्नात्युत्सृजेत् तेजो न च नित्यं मृदुर्भवेत्।
काले काले तु सम्प्राप्ते मृदुस्तीक्ष्णोऽपि वा भवेत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अतः न तो सदैव क्रोध करना चाहिए और न सदैव कोमल स्वभाव ही रखना चाहिए। समय-समय पर आवश्यकतानुसार कभी कोमल स्वभाव और कभी आक्रामक बन जाना चाहिए॥23॥
 
Therefore, neither should one always show anger nor should one always remain soft-natured. According to the need from time to time, one should sometimes become soft-natured and sometimes aggressive.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)