श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.28.22 
यस्मादुद्विजते लोक: कथं तस्य भवो भवेत्।
अन्तरं तस्य दृष्ट्वैव लोको विकुरुते ध्रुवम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सबको दुःख देता है, वह कल्याण कैसे प्राप्त कर सकता है? उसका थोड़ा-सा भी दोष देखकर लोग अवश्य ही उसकी निन्दा करने लगते हैं॥ 22॥
 
How can a person who causes distress to everyone attain prosperity? On seeing even his slightest flaw, people certainly start speaking ill of him.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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