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श्लोक 3.28.22  |
यस्मादुद्विजते लोक: कथं तस्य भवो भवेत्।
अन्तरं तस्य दृष्ट्वैव लोको विकुरुते ध्रुवम्॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य सबको दुःख देता है, वह कल्याण कैसे प्राप्त कर सकता है? उसका थोड़ा-सा भी दोष देखकर लोग अवश्य ही उसकी निन्दा करने लगते हैं॥ 22॥ |
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| How can a person who causes distress to everyone attain prosperity? On seeing even his slightest flaw, people certainly start speaking ill of him.॥ 22॥ |
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