Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.28.17: क्रोधी मनुष्य रजोगुण से आवृत होकर उचित-अनुचित अवसर का विचार किए बिना ही अपने उत्तेजित स्वभाव से नाना प्रकार से दूसरों को दण्डित करता है ॥17॥ | mahabharat अध्याय 3.28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अस्थाने यदि वा स्थाने सततं रजसाऽऽवृत:।
क्रुद्धो दण्डान् प्रणयति विविधान् स्वेन तेजसा॥ १७॥
अनुवाद
क्रोधी मनुष्य रजोगुण से आवृत होकर उचित-अनुचित अवसर का विचार किए बिना ही अपने उत्तेजित स्वभाव से नाना प्रकार से दूसरों को दण्डित करता है ॥17॥
An angry person, being covered by the mode of passion, without considering the appropriate or inappropriate occasion, by his agitated nature, punishes others in various ways. ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥