श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.28.16 
एते चान्ये च बहवो नित्यं दोषा: क्षमावताम्।
अथ वैरोचने दोषानिमान् विद्धॺक्षमावताम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ये तथा अन्य अनेक दोष सदैव क्षमा करने वालों को ही भुगतने पड़ते हैं। हे विरोचनपुत्र! अब क्षमा न करने वालों के दोष सुनो।॥16॥
 
These and many other faults are faced by those who always forgive. O son of Virochana, now listen to the faults of those who do not forgive.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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