श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.28.1 
द्रौपद्युवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
प्रह्लादस्य च संवादं बलेर्वैरोचनस्य च॥ १॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी कहती है - महाराज ! इस विषय में प्रह्लाद और विरोचनपुत्र बलि संवाद के रूप में इस प्राचीन इतिहास का उदाहरण देते थे ॥1॥
 
Draupadi says - Maharaj! In this matter, Prahlada and Virochana's son Bali used to give the example of this ancient history in the form of a dialogue.॥ 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas