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mahabharat 3.279.7: बादलों को भेदने वाले पर्वत शिखर के समान गिद्धराज जटायु को घायल करके रावण सीता को गोद में लेकर पुनः आकाश में चला गया।   |   mahabharat अध्याय 3.279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.279.7 
निहत्य गृध्रराजं स भिन्नाभ्रशिखरोपमम्।
ऊर्ध्वमाचक्रमे सीतां गृहीत्वाङ्केन राक्षस:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
बादलों को भेदने वाले पर्वत शिखर के समान गिद्धराज जटायु को घायल करके रावण सीता को गोद में लेकर पुनः आकाश में चला गया।
 
Having wounded Jatayu, the king of vultures, who was like a mountain peak piercing the clouds, Ravana again set out through the sky carrying Sita in his lap.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)