श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.279.6 
स वध्यमानो गृध्रेण रामप्रियहितैषिणा।
खड्गमादाय चिच्छेद भुजौ तस्य पतत्त्रिण:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी के हितैषी जटायु को इस प्रकार आक्रान्त होते देख रावण ने अपनी तलवार लेकर उस पक्षीराज के दोनों पंख काट डाले॥6॥
 
Seeing Jatayu, a well-wisher of Sri Rama, being attacked in this manner, Ravana took his sword and cut off both the wings of that king of birds. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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