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mahabharat 3.279.46: उससे मिलो और अपने दुःख का कारण बताओ। उसका स्वभाव और स्वभाव तुम्हारे जैसा ही है। वह अवश्य तुम्हारी सहायता करेगा॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 3.279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.279.46 
तेन त्वं सह संगम्य दु:खमूलं निवेदय।
समानशीलो भवत: साहाय्यं स करिष्यति॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
उससे मिलो और अपने दुःख का कारण बताओ। उसका स्वभाव और स्वभाव तुम्हारे जैसा ही है। वह अवश्य तुम्हारी सहायता करेगा॥ 46॥
 
‘Meet him and tell him the reason for your sadness. His character and nature is like yours. He will surely help you.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)