श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.279.45 
वसते तत्र सुग्रीवश्चतुर्भि: सचिवै: सह।
भ्राता वानरराजस्य वालिनो हेममालिन:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
'वहाँ वानरराज बालि का भाई सुग्रीव अपने चार मन्त्रियों के साथ स्वर्ण-माला से सुशोभित रहता है।
 
‘There lives Sugreeva, brother of Vali, the king of the monkeys, adorned with a golden garland, along with his four ministers.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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