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mahabharat 3.279.42-43: उसने कहा, 'हे राजन! मैं विश्वावसु नामक गंधर्व हूँ। एक ब्राह्मण के शाप से राक्षस योनि में जन्मा हूँ। लंकापति राक्षसराज रावण ने आपकी पत्नी सीता का अपहरण कर लिया है। आप वानरराज सुग्रीव से मिलें। वे आपकी सहायता करेंगे।'॥42-43॥   |   mahabharat अध्याय 3.279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  3.279.42-43 
तस्याचचक्षे गन्धर्वो विश्वावसुरहं नृप।
प्राप्तो ब्राह्मणशापेन योनिं राक्षससेविताम्॥ ४२॥
रावणेन हृता सीता राज्ञा लङ्काधिवासिना।
सुग्रीवमभिगच्छस्व स ते साह्यं करिष्यति॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उसने कहा, 'हे राजन! मैं विश्वावसु नामक गंधर्व हूँ। एक ब्राह्मण के शाप से राक्षस योनि में जन्मा हूँ। लंकापति राक्षसराज रावण ने आपकी पत्नी सीता का अपहरण कर लिया है। आप वानरराज सुग्रीव से मिलें। वे आपकी सहायता करेंगे।'॥42-43॥
 
He said, 'O King! I am a Gandharva named Vishwavasu. I was born as a demon due to the curse of a Brahmin. The demon king Ravana of Lanka has kidnapped your wife Sita. You should meet the monkey king Sugreeva. He will help you.'॥ 42-43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)