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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.279.40 
तस्य देहाद् विनि:सृत्य पुरुषो दिव्यदर्शन:।
ददृशे दिवमास्थाय दिवि सूर्य इव ज्वलन्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उसके शरीर से एक दिव्य सत्ता प्रकट हुई और आकाश में खड़ी दिखाई दी। वह सूर्य के समान चमक रही थी। 40.
 
A divine being emerged from his body and was seen standing in the sky. He was shining like the Sun. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)