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mahabharat 3.279.4: "यदि तुम मेरी पुत्रवधू सीता को नहीं छोड़ोगे तो तुम मेरे हाथों से जीवित नहीं बच पाओगे।" ऐसा कहकर जटायु ने राक्षसराज रावण को अपने नाखूनों से बुरी तरह घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.279.4 
न हि मे मोक्ष्यसे जीवन् यदि नोत्सृजसे वधूम्।
उक्त्वैवं राक्षसेन्द्रं तं चकर्त नखरैर्भृशम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
"यदि तुम मेरी पुत्रवधू सीता को नहीं छोड़ोगे तो तुम मेरे हाथों से जीवित नहीं बच पाओगे।" ऐसा कहकर जटायु ने राक्षसराज रावण को अपने नाखूनों से बुरी तरह घायल कर दिया।
 
"If you do not release my daughter-in-law Sita, you will not be able to escape from my hands alive." Saying so, Jatayu injured the demon king Ravana very badly with his nails.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)