श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  3.279.38-39 
ततोऽस्य दक्षिणं बाहु खड्गेनाजघ्निवान् बली।
सौमित्रिरपि सम्प्रेक्ष्य भ्रातरं राघवं स्थितम्॥ ३८॥
पुनर्जघान पार्श्वे वै तद् रक्षो लक्ष्मणो भृशम्।
गतासुरपतद् भूमौ कबन्ध: सुमहांस्तत:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् बलवान सुमित्रानन्दन लक्ष्मण ने भी अपनी तलवार से उसकी दाहिनी भुजा काट डाली और अपने भाई श्री राम को वहाँ खड़ा देखकर उसकी पसली पर भी बड़े जोर से प्रहार किया। तब वह महादैत्य कबन्ध प्राणहीन होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा। 38-39॥
 
Thereafter, the strong Sumitranandan Lakshman also cut off his right arm with his sword and seeing his brother Shri Ram standing there, he also attacked his rib with great force. Then that great demon Kabandha became lifeless and fell on the earth. 38-39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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