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mahabharat 3.279.36: हे पुरुषश्रेष्ठ! शोक मत करो। जब तक मैं यहाँ हूँ, यह राक्षस कुछ भी नहीं है; यह तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। तुम इसकी दाहिनी भुजा काट दो। मैं इसकी बाईं भुजा काट रहा हूँ।॥36॥   |   mahabharat अध्याय 3.279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.279.36 
मा विषीद नरव्याघ्र नैष कश्चिन्मयि स्थिते।
छिन्ध्यस्य दक्षिणं बाहुं छिन्न: सव्यो मया भुज:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! शोक मत करो। जब तक मैं यहाँ हूँ, यह राक्षस कुछ भी नहीं है; यह तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। तुम इसकी दाहिनी भुजा काट दो। मैं इसकी बाईं भुजा काट रहा हूँ।॥36॥
 
O best of men! Do not be sorry. As long as I am here this demon is nothing; he cannot harm you. You cut off his right arm. I am cutting off his left arm.'॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)