श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.279.35 
एवं बहुविधं धीमान् विललाप स लक्ष्मण:।
तमुवाचाथ काकुत्स्थ: सम्भ्रमेष्वप्यसम्भ्रम:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान लक्ष्मण नाना प्रकार से विलाप करने लगे। भगवान् श्री राम घबराहट के समय भी नहीं घबराए। उन्होंने लक्ष्मण से कहा-॥35॥
 
Intelligent Lakshmana started wailing in various ways. Lord Shri Ram did not panic even in times of panic. He said to Lakshmana -॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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