श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.279.34 
द्रक्ष्यन्त्यार्यस्य धन्या ये कुशलाजशमीदलै:।
अभिषिक्तस्य वदनं सोमं शान्तघनं यथा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
धन्य हैं वे लोग जो कुशा, लाजा और शमीपत्र आदि की सहायता से राजा के रूप में अभिषिक्त होकर, मेघों के आवरण से मुक्त शरद ऋतु के चन्द्रमा के समान सुन्दर तुम्हारा मुख देखेंगे।॥34॥
 
Blessed are those who, anointed as king with the help of Kusha grass, Laja and Shamipatra etc., will see the beautiful face of you Arya, like the autumn moon, free from the veil of clouds.'॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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