श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.279.31 
स राममभिसम्प्रेक्ष्य कृष्यते येन तन्मुखम्।
विषण्णश्चाब्रवीद् रामं पश्यावस्थामिमां मम॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वह राक्षस का मुख जिस ओर था, उसी ओर खिंचा जा रहा था। फिर उसने श्री राम की ओर देखकर अत्यन्त दुःखी स्वर में कहा - 'भैया! देखो, मुझे क्या हो रहा है?॥ 31॥
 
He was being drawn towards the direction in which the face of the demon was facing. Then looking at Shri Ram, he said in a very sad tone - 'Brother! See what is happening to me?॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)