Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.279.30: वह एक राक्षस था। उसने अचानक आकर लक्ष्मण का हाथ पकड़ लिया। हे प्रभु! यह देखकर सुमित्रापुत्र लक्ष्मण तुरन्त बहुत दुःखी हो गए। 30।   |   mahabharat अध्याय 3.279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.279.30 
यदृच्छयाथ तद् रक्ष: करे जग्राह लक्ष्मणम्।
विषादमगमत् सद्य: सौमित्रिरथ भारत॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वह एक राक्षस था। उसने अचानक आकर लक्ष्मण का हाथ पकड़ लिया। हे प्रभु! यह देखकर सुमित्रापुत्र लक्ष्मण तुरन्त बहुत दुःखी हो गए। 30।
 
He was a demon. He suddenly came and caught hold of Lakshmana's hand. O Lord! Seeing this, Sumitra's son Lakshmana immediately became very sad. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)