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mahabharat 3.279.26: सीताहरण से दोनों भाइयों को बड़ा दुःख हुआ। वे शोक और शोक में डूब गए। तब शत्रुओं को संताप देने वाले श्री राम और लक्ष्मण दण्डकारण्य से दक्षिण दिशा की ओर चले। 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.279.26 
दु:खशोकसमाविष्टौ वैदेहीहरणार्दितौ।
जग्मतुर्दण्डकारण्यं दक्षिणेन परंतपौ॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सीताहरण से दोनों भाइयों को बड़ा दुःख हुआ। वे शोक और शोक में डूब गए। तब शत्रुओं को संताप देने वाले श्री राम और लक्ष्मण दण्डकारण्य से दक्षिण दिशा की ओर चले। 26॥
 
Sita's kidnapping caused great pain to both the brothers. They were drowned in sorrow and grief. Then Shri Ram and Lakshman, who tormented the enemies, moved towards the south from Dandakaranya. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)