श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.279.23 
अपृच्छद् राघवो गृध्रं रावण: कां दिशं गत:।
तस्य गृध्र: शिर:कम्पैराचचक्षे ममार च॥ २३॥
 
 
अनुवाद
श्री राम ने जटायु से पूछा, ‘रावण किस दिशा में गया है?’ गिद्ध ने सिर हिलाकर दक्षिण दिशा की ओर संकेत किया और फिर प्राण त्याग दिए।
 
Sri Rama asked Jatayu, 'Which direction has Ravana gone?' The vulture shook his head and indicated the south and then gave up his life.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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