श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.279.21 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा संगृह्य धनुषी शुभे।
कोऽयं पितरमस्माकं नाम्नाऽऽहेत्यूचतुश्च तौ॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यह वचन सुनकर उन्होंने अपने सुन्दर धनुष उतारकर हाथ में ले लिए और एक-दूसरे से पूछने लगे, ‘यह कौन है जो हमारे पिता का नाम लेकर अपना परिचय दे रहा है?’॥ 21॥
 
On hearing these words, they took off their beautiful bows and held them in their hands and began asking each other, 'Who is this who is introducing himself using our father's name?'॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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