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mahabharat 3.279.14: अपने भाई को देखते ही श्री राम ने उसे शाप देते हुए कहा, 'लक्ष्मण! राक्षसों से भरे इस घने वन में तू जानकी को अकेला छोड़कर यहाँ कैसे आ गया?'॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.279.14 
कथमुत्सृज्य वैदेहीं वने राक्षससेविते।
इति तं भ्रातरं दृष्ट्वा प्राप्तोऽसीति व्यगर्हयत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अपने भाई को देखते ही श्री राम ने उसे शाप देते हुए कहा, 'लक्ष्मण! राक्षसों से भरे इस घने वन में तू जानकी को अकेला छोड़कर यहाँ कैसे आ गया?'॥14॥
 
On seeing his brother, Shri Ram cursed him and said, 'Laxman! How did you come here leaving Janaki alone in this dense forest infested with demons?'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)