श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.279.10 
तत् तेषां वानरेन्द्राणां पपात पवनोद्‍धुतम्।
मध्ये सुपीतं पञ्चानां विद्युन्मेघान्तरे यथा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वह सुन्दर पीतवर्णी वस्त्र आकाश में उड़कर उन पाँचों वानरों के बीच में आ गिरा, मानो बादलों के बीच में बिजली चमक उठी हो ॥10॥
 
That beautiful yellow coloured garment flew in the sky and fell in the midst of those five monkeys, as if lightning had appeared in the midst of the clouds. ॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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