श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.279.1 
मार्कण्डेय उवाच
सखा दशरथस्यासीज्जटायुररुणात्मज:।
गृध्रराजो महावीर: सम्पातिर्यस्य सोदर:॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! महावीर गिद्धराज जटायु (सूर्य के सारथी) अरुण के पुत्र थे। उनके बड़े भाई का नाम सम्पाती था। राजा दशरथ से उनकी बहुत मित्रता थी।
 
Markandeyji says- Yudhishthira! Mahavir was the son of vulture king Jatayu (sun's charioteer) Arun. His elder brother's name was Sampati. He was very friendly with King Dasharath.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)