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mahabharat 3.278.7-8h: भला! इस संसार में ऐसा कौन वीर है जो परम प्रभु श्री राम के बाणों के वेग को झेल सके? मैं यहाँ संन्यासी बना हूँ, इसका कारण भी वे ही पुरुषोत्तम श्री राम हैं। श्री राम से वैर करना विनाश के मुख में जाने के समान है। किस दुष्टात्मा ने तुम्हें ऐसा करने की सलाह दी है?॥7 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  3.278.7-8h 
बाणवेगं हि कस्तस्य शक्त: सोढुं महात्मन:।
प्रव्रज्यायां हि मे हेतु: स एव पुरुषर्षभ:॥ ७॥
विनाशमुखमेतत् ते केनाख्यातं दुरात्मना।
 
 
अनुवाद
भला! इस संसार में ऐसा कौन वीर है जो परम प्रभु श्री राम के बाणों के वेग को झेल सके? मैं यहाँ संन्यासी बना हूँ, इसका कारण भी वे ही पुरुषोत्तम श्री राम हैं। श्री राम से वैर करना विनाश के मुख में जाने के समान है। किस दुष्टात्मा ने तुम्हें ऐसा करने की सलाह दी है?॥7 1/2॥
 
Well! Who is such a brave man in this world who can withstand the speed of the arrows of the Supreme Lord Shri Ram? The reason that I have become a Sanyasi here is also that gem of a man Shri Ram. To take enmity with Shri Ram is like going into the mouth of destruction. Which evil soul has advised you to do so?'॥ 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)