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mahabharat 3.278.43: तब रावण ने उनके केश पकड़े और आकाश मार्ग से लंका की ओर चल दिया। उस समय तपस्विनी सीता रोती हुई 'हा राम-हा राम' कह रही थीं और राक्षस उनका अपहरण कर ले जा रहा था। इस अवस्था में, पर्वत की गुफा में रहने वाले गिद्धराज जटायु ने उन्हें देख लिया। 43.   |   mahabharat अध्याय 3.278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.278.43 
मूर्धजेषु निजग्राह ऊर्ध्वमाचक्रमे तत:।
तां ददर्श ततो गृध्रो जटायुर्गिरिगोचर:।
रुदतीं राम रामेति ह्रियमाणां तपस्विनीम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तब रावण ने उनके केश पकड़े और आकाश मार्ग से लंका की ओर चल दिया। उस समय तपस्विनी सीता रोती हुई 'हा राम-हा राम' कह रही थीं और राक्षस उनका अपहरण कर ले जा रहा था। इस अवस्था में, पर्वत की गुफा में रहने वाले गिद्धराज जटायु ने उन्हें देख लिया। 43.
 
Then Ravana grabbed her hair and left for Lanka through the sky route. At that time the ascetic Sita was crying and chanting 'Ha Rama-Ha Rama' and the demon was kidnapping her. In this condition, the vulture king Jatayu, who lived in a mountain cave, saw her. 43.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि रामोपाख्यानपर्वणि मारीचवधे सीताहरणे च अष्टसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २७८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्वमें मारीचवध तथा सीताहरणविषयक

दो सौ अठहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)