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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.278.39 
कथं हि भिन्नकरटं पद्मिनं वनगोचरम्।
उपस्थाय महानागं करेणु: सूकरं स्पृशेत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
‘जिसके नितम्बों से अमृत बहता है, उस कमल की माला से सुशोभित वनवासी हाथी की सेवा करती हुई हथिनी सूअर को कैसे स्पर्श कर सकती है?॥ 39॥
 
‘How can a female elephant touch a boar while serving the forest-dwelling elephant adorned with a garland of lotus whose nectar flows from its buttocks?॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)