Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.278.2: जब रावण बैठ गया और विश्राम करने लगा, तब उसके पास बैठा हुआ और बातचीत करने में निपुण राक्षस मारीच ने शब्दों के सार को समझने में निपुण रावण से विनम्रतापूर्वक कहा -॥2॥ | mahabharat अध्याय 3.278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विश्रान्तं चैनमासीनमन्वासीन: स राक्षस:।
उवाच प्रश्रितं वाक्यं वाक्यज्ञो वाक्यकोविदम्॥ २॥
अनुवाद
जब रावण बैठ गया और विश्राम करने लगा, तब उसके पास बैठा हुआ और बातचीत करने में निपुण राक्षस मारीच ने शब्दों के सार को समझने में निपुण रावण से विनम्रतापूर्वक कहा -॥2॥
When Ravana had sat down and rested, Maricha, a skilled demon sitting beside him and being adept at conversing, said politely to Ravana who was adept at understanding the essence of words -॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥