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mahabharat 3.277.7-8h: युधिष्ठिर! राजा दशरथ बड़े बुद्धिमान थे। उन्होंने यह सोचकर कि अब मेरी आयु बहुत हो गई है, अतः श्री राम का ही युवराज पद पर अभिषेक होना चाहिए, अपने मंत्रियों और धर्माचार्यों से इस विषय में परामर्श लिया।   |   mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  3.277.7-8h 
तत: स राजा मतिमान् मत्वाऽऽत्मानं वयोऽधिकम्।
मन्त्रयामास सचिवैर्धर्मज्ञैश्च पुरोहितै:॥ ७॥
अभिषेकाय रामस्य यौवराज्येन भारत।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! राजा दशरथ बड़े बुद्धिमान थे। उन्होंने यह सोचकर कि अब मेरी आयु बहुत हो गई है, अतः श्री राम का ही युवराज पद पर अभिषेक होना चाहिए, अपने मंत्रियों और धर्माचार्यों से इस विषय में परामर्श लिया।
 
Yudhishthira! King Dasharath was very wise. Thinking that now my age has become very old, therefore Shri Ram should be anointed as the crown prince, he took advice from his ministers and religious priests in this matter. 71 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)