Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.277.6: बुद्धिमान श्री राम चारों पुत्रों में सबसे बड़े थे। वे अपने मनोहर रूप और सुंदर स्वभाव से समस्त प्रजा को आनंदित करते थे - सबका मन उनमें रमता था। इसके अतिरिक्त वे अपने पिता के हृदय को भी आनंदित करते थे। 6॥ | mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ज्येष्ठो रामोऽभवत् तेषां रमयामास हि प्रजा:।
मनोहरतया धीमान् पितुर्हृदयनन्दन:॥ ६॥
अनुवाद
बुद्धिमान श्री राम चारों पुत्रों में सबसे बड़े थे। वे अपने मनोहर रूप और सुंदर स्वभाव से समस्त प्रजा को आनंदित करते थे - सबका मन उनमें रमता था। इसके अतिरिक्त वे अपने पिता के हृदय को भी आनंदित करते थे। 6॥
Intelligent Shri Ram was the eldest among the four sons. He used to make all the people happy with his charming appearance and beautiful nature – everyone's heart was absorbed in him. Apart from this, he also brought joy to his father's heart. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥