Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.277.56: वहाँ रावण की भेंट अपने पूर्व मंत्री मारीच से हुई, जो श्री रामचन्द्रजी के भय से पहले से ही उस स्थान पर आकर तपस्या कर रहा था॥56॥ | mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्राभ्यगच्छन्मारीचं पूर्वामात्यं दशानन:।
पुरा रामभयादेव तापस्यं समुपाश्रितम्॥ ५६॥
अनुवाद
वहाँ रावण की भेंट अपने पूर्व मंत्री मारीच से हुई, जो श्री रामचन्द्रजी के भय से पहले से ही उस स्थान पर आकर तपस्या कर रहा था॥56॥
There Ravana met his former minister Marich, who had already been coming to that place and doing penance due to the fear of Shri Ramchandraji. 56॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि रामोपाख्यानपर्वणि रामवनाभिगमने सप्तसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २७७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्वमें श्रीरामवनगमनविषयक दो सौ सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७७॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ५६ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥