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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.277.54 
त्रिकूटं समतिक्रम्य कालपर्वतमेव च।
ददर्श मकरावासं गम्भीरोदं महोदधिम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
त्रिकूट और कालपर्वत को पार करते हुए उन्होंने गहरे समुद्र को देखा, जो मगरमच्छों का निवास था।
 
Crossing the Trikuta and Kalaparvat he saw the deep ocean, the abode of crocodiles. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)