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mahabharat 3.277.53: यह सुनकर रावण ने अपना कर्तव्य निश्चय किया और अपनी बहन को सांत्वना देकर तथा नगर की रक्षा आदि की व्यवस्था करके वह आकाश मार्ग से उड़ गया।   |   mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.277.53 
स निश्चित्य तत: कृत्यं स्वसारमुपसान्त्व्य च।
ऊर्ध्वमाचक्रमे राजा विधाय नगरे विधिम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर रावण ने अपना कर्तव्य निश्चय किया और अपनी बहन को सांत्वना देकर तथा नगर की रक्षा आदि की व्यवस्था करके वह आकाश मार्ग से उड़ गया।
 
On hearing this Ravana decided about his duty and after consoling his sister and making arrangements for the protection of the city etc. he flew away through the sky. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)