Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.277.50: कौन अपने पैरों से अत्यंत भयंकर विषैले सर्प को कुचल रहा है? और कौन सिंह के जबड़े में हाथ डाले निश्चिन्त खड़ा है?॥50॥   |   mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.277.50 
आशीविषं घोरतरं पादेन स्पृशतीह क:।
सिंहं केसरिणं कश्च दंष्ट्रायां स्पृश्य तिष्ठति॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
कौन अपने पैरों से अत्यंत भयंकर विषैले सर्प को कुचल रहा है? और कौन सिंह के जबड़े में हाथ डाले निश्चिन्त खड़ा है?॥50॥
 
Who is crushing a very dangerous poisonous snake with his feet? And who is standing carefree with his hand in the jaws of the lion?'॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)