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mahabharat 3.277.46: रावण के पास पहुँचकर राक्षसी दुःख से मूर्छित होकर अपने भाई के चरणों में गिर पड़ी। उसके मुख से बहता हुआ रक्त सूख गया था। 46.   |   mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.277.46 
ततो रावणमभ्येत्य राक्षसी दु:खमूर्च्छिता।
पपात पादयोर्भ्रातु: संशुष्करुधिरानना॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
रावण के पास पहुँचकर राक्षसी दुःख से मूर्छित होकर अपने भाई के चरणों में गिर पड़ी। उसके मुख से बहता हुआ रक्त सूख गया था। 46.
 
On reaching Ravana the demoness fainted out of grief and fell at her brother's feet. The blood flowing on her face had dried up. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)