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mahabharat 3.277.42: वहाँ निवास करते समय श्री रामजी का जनस्थान निवासी खर नामक राक्षस से बड़ा वैर हो गया, क्योंकि शूर्पणखा ने उसके नाक, कान और ओठ काट डाले थे ॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.277.42 
वसतस्तस्य रामस्य तत: शूर्पणखाकृतम्।
खरेणासीन्महद् वैरं जनस्थाननिवासिना॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ निवास करते समय श्री रामजी का जनस्थान निवासी खर नामक राक्षस से बड़ा वैर हो गया, क्योंकि शूर्पणखा ने उसके नाक, कान और ओठ काट डाले थे ॥ 42॥
 
While residing there, Sri Rama developed a great enmity with a demon named Khar, a resident of Janasthan, due to Shurpanakha cutting off his nose, ears and lips. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)