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mahabharat 3.277.41: वहाँ शरभंग ऋषि का सम्मान करने के बाद वे दण्डकारण्य चले गये और सुन्दर गोदावरी नदी के तट पर आश्रय लिया।   |   mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.277.41 
सत्कृत्य शरभङ्गं स दण्डकारण्यमाश्रित:।
नदीं गोदावरीं रम्यामाश्रित्य न्यवसत् तदा॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
वहाँ शरभंग ऋषि का सम्मान करने के बाद वे दण्डकारण्य चले गये और सुन्दर गोदावरी नदी के तट पर आश्रय लिया।
 
There, after honouring the sage Sharabhang, he went to Dandakaranya and took shelter on the banks of the beautiful river Godavari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)