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mahabharat 3.277.4-5: धीरे-धीरे राजा के परम प्रतापी पुत्र बड़े हुए। (उपनयन के बाद) उन्होंने विधिपूर्वक ब्रह्मचर्य का पालन किया और वेद-सूत्र तथा धनुर्वेद के रहस्यों में पारंगत हो गए। जब ​​समयानुसार उनका विवाह हो गया, तब राजा दशरथ बहुत प्रसन्न और संतुष्ट हुए। ॥4-5॥   |   mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  3.277.4-5 
क्रमेण चास्य ते पुत्रा व्यवर्धन्त महौजस:।
वेदेषु सरहस्येषु धनुर्वेदेषु पारगा:॥ ४॥
चरितब्रह्मचर्यास्ते कृतदाराश्च पार्थिव।
यदा तदा दशरथ: प्रीतिमानभवत् सुखी॥ ५॥
 
 
अनुवाद
धीरे-धीरे राजा के परम प्रतापी पुत्र बड़े हुए। (उपनयन के बाद) उन्होंने विधिपूर्वक ब्रह्मचर्य का पालन किया और वेद-सूत्र तथा धनुर्वेद के रहस्यों में पारंगत हो गए। जब ​​समयानुसार उनका विवाह हो गया, तब राजा दशरथ बहुत प्रसन्न और संतुष्ट हुए। ॥4-5॥
 
Gradually the king's highly illustrious sons grew up. (After Upanayana) They observed celibacy as prescribed by the law and became proficient in the Vedas and Dhanurveda with its secrets. When their marriage took place as per the time, then King Dasharath became very happy and content. ॥4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)