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mahabharat 3.277.35: वह सब लोगों और मंत्रियों को अपना वृत्तान्त समझाकर अपने भाई श्री राम को वन से वापस लाने की इच्छा से उनके मार्ग पर चल पड़ा॥35॥   |   mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.277.35 
स चारित्रं विशोध्याथ सर्वप्रकृतिसंनिधौ।
अन्वयाद् भ्रातरं रामं विनिवर्तनलालस:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वह सब लोगों और मंत्रियों को अपना वृत्तान्त समझाकर अपने भाई श्री राम को वन से वापस लाने की इच्छा से उनके मार्ग पर चल पड़ा॥35॥
 
He explained himself to all the people and ministers and followed the path of his brother Shri Ram with the desire to bring him back from the forest. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)