Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.277.33-34: भरत बड़े धर्मपरायण थे। अपनी माँ की बातें सुनकर उन्होंने उनसे कहा - 'हे माता! कुल के लिए कलंक! धन के लोभ में तुमने कैसा क्रूर कर्म किया है? तुमने अपने पति को मारकर इस कुल का नाश कर दिया है। मेरे माथे पर कलंक का टीका लगाओ और अपनी मनोकामना पूर्ण करो।' यह कहकर भरत फूट-फूटकर रोने लगे। | mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तामुवाच स धर्मात्मा नृशंसं बत ते कृतम्।
पतिं हत्वा कुलं चेदमुत्साद्य धनलुब्धया॥ ३३॥
अयश: पातयित्वा मे मूर्ध्नि त्वं कुलपांसने।
सकामा भव मे मातरित्युक्त्वा प्ररुरोद ह॥ ३४॥
अनुवाद
भरत बड़े धर्मपरायण थे। अपनी माँ की बातें सुनकर उन्होंने उनसे कहा - 'हे माता! कुल के लिए कलंक! धन के लोभ में तुमने कैसा क्रूर कर्म किया है? तुमने अपने पति को मारकर इस कुल का नाश कर दिया है। मेरे माथे पर कलंक का टीका लगाओ और अपनी मनोकामना पूर्ण करो।' यह कहकर भरत फूट-फूटकर रोने लगे।
Bharata was a very pious person. On hearing his mother's words, he said to her - 'Mother, who is a disgrace to the family! What a cruel act you have committed in the greed of money? You have killed your husband and destroyed this family. 'Put a mark of disgrace on my forehead and fulfill your desire.' Saying this, Bharata started crying profusely.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥