Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.277.28: श्री रामचन्द्रजी पराक्रमी तो थे ही, साथ ही अत्यन्त धर्मात्मा भी थे। पिता के पूर्वोक्त वरदान को जानकर वे राजा के सत्य की रक्षा के उद्देश्य से स्वयं वन को चले गए॥ 28॥ | mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री रामचन्द्रजी पराक्रमी तो थे ही, साथ ही अत्यन्त धर्मात्मा भी थे। पिता के पूर्वोक्त वरदान को जानकर वे राजा के सत्य की रक्षा के उद्देश्य से स्वयं वन को चले गए॥ 28॥
Shri Ramchandraji was not only powerful but also very pious. Knowing about the aforementioned boon of his father, he himself left for the forest with the objective of protecting the truth of the king.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥