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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.277.24 
पृथिव्यां राजराजोऽस्मि चातुर्वर्ण्यस्य रक्षिता।
यस्तेऽभिलषित: कामो ब्रूहि कल्याणि मा चिरम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इस समय मैं इस जगत् के राजाओं का राजा हूँ, चारों वर्णों की रक्षा करता हूँ। कल्याणी! तुम्हारी जो भी अभीष्ट इच्छा हो, वह मुझसे कहो, विलम्ब न करो।
 
At this time I am the King of Kings of this world, I protect all the four castes. Kalyani! Whatever your desired wish is, tell me, do not delay.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)