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mahabharat 3.277.21: हे महाराज! आप सच्चे प्रतिज्ञाशील हैं! आपने पहले कहा था, "मैं आपकी मनोकामना पूर्ण करूँगा।" आज उस वरदान को पूरा करके इस संकट से मुक्त हो जाइए।॥21॥   |   mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.277.21 
सत्यप्रतिज्ञ यन्मे त्वं काममेकं निसृष्टवान्।
उपाकुरुष्व तद् राजंस्तस्मान्मुच्यस्व संकटात्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज! आप सच्चे प्रतिज्ञाशील हैं! आपने पहले कहा था, "मैं आपकी मनोकामना पूर्ण करूँगा।" आज उस वरदान को पूरा करके इस संकट से मुक्त हो जाइए।॥21॥
 
O Maharaj, you are a true pledger! You had earlier said, "I will fulfill your desire." Fulfill that boon today and be free from this problem.'॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)