Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.277.19-20: मन्थरा की यह बात सुनकर पतली कमर वाली, सब आभूषणों से सुसज्जित तथा अत्यंत सुंदर रूप वाली देवी कैकेयी एकांत में अपने पति के पास गईं। उनकी मुस्कान उनके शुद्ध भावों का परिचायक थी। वे मधुर वाणी में ऐसी बोलीं मानो हँसकर प्रेम प्रकट कर रही हों -॥19-20॥ | mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मन्थरा की यह बात सुनकर पतली कमर वाली, सब आभूषणों से सुसज्जित तथा अत्यंत सुंदर रूप वाली देवी कैकेयी एकांत में अपने पति के पास गईं। उनकी मुस्कान उनके शुद्ध भावों का परिचायक थी। वे मधुर वाणी में ऐसी बोलीं मानो हँसकर प्रेम प्रकट कर रही हों -॥19-20॥
On hearing this from Manthra, Goddess Kaikeyi, who had a thin waist and was adorned with all the ornaments and made a very beautiful appearance, went to her husband in solitude. Her smile was indicative of her pure intentions. She spoke in a sweet voice as if she was laughing and expressing love -॥19-20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥