Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.277.1-2: युधिष्ठिर ने पूछा- ब्रह्मन्! आपने श्री रामचन्द्रजी आदि सभी भाइयों के जन्म की कथा अलग-अलग कही है, अब मैं उनके वनवास का कारण सुनना चाहता हूँ; उसे बताइए। दशरथजी के वीर पुत्र, भाई श्री राम और लक्ष्मण तथा मिथिलेशकुमारी यशस्विनी सीता को वन क्यों जाना पड़ा? 1-2॥ | mahabharat अध्याय 3.277: श्रीरामके राज्याभिषेककी तैयारी, रामवनगमन, भरतकी चित्रकूटयात्रा, रामके द्वारा खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश तथा रावणका मारीचके पास जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
उक्तं भगवता जन्म रामादीनां पृथक् पृथक्।
प्रस्थानकारणं ब्रह्मन् श्रोतुमिच्छामि कथ्यताम्॥ १॥
कथं दाशरथी वीरौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।
सम्प्रस्थितौ वने ब्रह्मन् मैथिली च यशस्विनी॥ २॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- ब्रह्मन्! आपने श्री रामचन्द्रजी आदि सभी भाइयों के जन्म की कथा अलग-अलग कही है, अब मैं उनके वनवास का कारण सुनना चाहता हूँ; उसे बताइए। दशरथजी के वीर पुत्र, भाई श्री राम और लक्ष्मण तथा मिथिलेशकुमारी यशस्विनी सीता को वन क्यों जाना पड़ा? 1-2॥
Yudhishthir asked – Brahmin! You have told the story of the birth of all the brothers like Shri Ramchandraji separately, now I want to hear the reason for their exile; Tell him. Why did Dashrathji's brave sons, brothers Shri Ram and Lakshman and Mithilesh Kumari Yashaswini Sita have to go to the forest? 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥