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mahabharat 3.276.8: तत्पश्चात् देवता, गन्धर्व और नागगण अपने-अपने अंशों सहित इस पृथ्वी पर अवतार लेने के लिए एक-दूसरे से परामर्श करने लगे॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.276: देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाकर रावणके अत्याचारसे बचानेके लिये प्रार्थना करना तथा ब्रह्माजीकी आज्ञासे देवताओंका रीछ और वानरयोनिमें संतान उत्पन्न करना एवं दुन्दुभी गन्धर्वीका मन्थरा बनकर आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 276: देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाकर रावणके अत्याचारसे बचानेके लिये प्रार्थना करना तथा ब्रह्माजीकी आज्ञासे देवताओंका रीछ और वानरयोनिमें संतान उत्पन्न करना एवं दुन्दुभी गन्धर्वीका मन्थरा बनकर आना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.276.8 
ततो भागानुभागेन देवगन्धर्वपन्नगा:।
अवतर्तुं महीं सर्वे मन्त्रयामासुरञ्जसा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवता, गन्धर्व और नागगण अपने-अपने अंशों सहित इस पृथ्वी पर अवतार लेने के लिए एक-दूसरे से परामर्श करने लगे॥8॥
 
Thereafter the Gods, Gandharvas and Nagas started consulting each other to incarnate on this earth with their respective parts and components. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)