Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.276.5: मैंने चतुर्भुज भगवान विष्णु से उस राक्षस का दमन करने की प्रार्थना की थी। मेरी प्रार्थना से भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लिया है। वे योद्धाओं में श्रेष्ठ हैं; अतः रावण का दमन करने का उत्तरदायित्व उन्हीं का होगा॥5॥ | mahabharat अध्याय 3.276: देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाकर रावणके अत्याचारसे बचानेके लिये प्रार्थना करना तथा ब्रह्माजीकी आज्ञासे देवताओंका रीछ और वानरयोनिमें संतान उत्पन्न करना एवं दुन्दुभी गन्धर्वीका मन्थरा बनकर आना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदर्थमवतीर्णोऽसौ मन्नियोगाच्चतुर्भुज:।
विष्णु: प्रहरतां श्रेष्ठ: स तत् कर्म करिष्यति॥ ५॥
अनुवाद
मैंने चतुर्भुज भगवान विष्णु से उस राक्षस का दमन करने की प्रार्थना की थी। मेरी प्रार्थना से भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लिया है। वे योद्धाओं में श्रेष्ठ हैं; अतः रावण का दमन करने का उत्तरदायित्व उन्हीं का होगा॥5॥
I had requested the four-armed Lord Vishnu to subdue that demon. Due to my prayers, the Lord has incarnated on earth. He is the best among warriors; hence, he alone will be responsible for subduing Ravana. ॥5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥