Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.276.4: ब्रह्माजी ने कहा - अग्नि! उसे न तो देवता और न ही दानव युद्ध में परास्त कर सकते हैं। उसके विनाश के लिए जो कुछ भी आवश्यक था, वह कर दिया गया है। अब उस दुष्ट का हर प्रकार से दमन किया जाएगा॥ 4॥ | mahabharat अध्याय 3.276: देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाकर रावणके अत्याचारसे बचानेके लिये प्रार्थना करना तथा ब्रह्माजीकी आज्ञासे देवताओंका रीछ और वानरयोनिमें संतान उत्पन्न करना एवं दुन्दुभी गन्धर्वीका मन्थरा बनकर आना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मोवाच
न स देवासुरै: शक्यो युद्धे जेतुं विभावसो।
विहितं तत्र यत् कार्यमभितस्तस्य निग्रह:॥ ४॥
अनुवाद
ब्रह्माजी ने कहा - अग्नि! उसे न तो देवता और न ही दानव युद्ध में परास्त कर सकते हैं। उसके विनाश के लिए जो कुछ भी आवश्यक था, वह कर दिया गया है। अब उस दुष्ट का हर प्रकार से दमन किया जाएगा॥ 4॥
Brahmaji said - Agni! Neither gods nor demons can defeat him in battle. Whatever was necessary for his destruction has been done. Now that evil will be suppressed in every way.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥